कोरोना लोकगीत

बोल-
पिचिक जाई नकुना,अउ छोट होई आँखी
हाय रे ई कोरोना कुछ, राखिस नाहि बाकी।।
हाय रे०—–
1-
बैला यस मुँह मा लगाय दिहिस जाबा
घर का जिहेल किहिस कासी औ काबा
आवा-जाही बंद किहिस, अब केहका ताकी
हाय रे कोरोना ०—-

2-
कउनौ त्योहार नाही, मूँड़न न शादी
ज्यादा परेशान नौकी आबादी
चिरई यस पिंजरा से, कब तक के झाँकी
हाय रे कोरोना ०——

3-
घरहिन मा मुर्गी, यस देत रहौ अण्डा
बहिरे जौ निकरौ, पुलिस मारै डण्डा
घरहिन मा खेलौ भैया, किरकेट औ हाकी
हाय रे कोरोना ०—–

4-
उनकै तौ कुछ ना, रकम जेहके मोटी
लेकिन गरिबवन कै, बंद रोजी रोटी
प्रीतम कोरोना कै, मरि जाये काकी
हाय रे कोरोना ०—-

प्रीतम श्रावस्तवी
श्रावस्ती (उ०प्र०)

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मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत... View full profile
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