लॉकडाउन में मुझे तुम्हारी याद सताती है

लाकडाउन में मुझे तुम्हारी, याद सताती है
कितना मिस करता हूं तुमको, जीभ बहुत ललचाती है
कब से नहीं जलेबी खाई, न पप्पू का पोहा
खाए नहीं समोसे-कचोरी, कितना लाकडाउन में खोया
खाई नहीं मिठाई मनभावन, दिल रबड़ी को रोया
निकल रहा है सूखा सावन, न गुलाबजामुन न खोआ
ठेले पर चाट न खाई, न फुल्की हल्कू राम की
बंद पड़े बाजार, मिठाई बृजवासी की दुकान की
तुम्हें नहीं मालूम करोना, कहां-कहां हम जाते थे
तफरी करते थे बाजारों में, मनचाही चीजें खाते थे
बंद हुई सब यार दोस्ती, पिकनिक सैर सपाटा
पढ़े हुए हैं घर में अपने, अब भरते हैं खर्राटा
ये मन तो उड़ उड़ जाता है, मिष्ठान की बंद दुकानों में
डर लगता है आ न जाएं, पॉजिटिव कैरोना में
कितने हो बेदर्द करोना, बच्चों का तो ख्याल करो
चिड़चिड़े हुए सब लोग-लुगाई, जल्दी पानी में डूब मरो
स्थिति सामान्य जब होगी, भरपेट मिठाई खाऊंगा
इसे भगा दो कृष्ण कन्हैया,
माखनमिश्री का भोग लगाऊंगा

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