कविता · Reading time: 1 minute

लूट की छूट

जिन लोगों ने देश को लूटा सत्तर साल,
हित चिंतक बन देश के ठोक रहे हैं ताल,
सत्ता फिर से मिल गई फिर से होगी लूट,
मिली लूट की छूट फिर अब ना रहा मलाल।
मधुसूदन दीक्षित

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