लापरवाही

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सायरन बजाती हुई एम्बूलैंस के ब्रेक चरमराने के साथ ही एम्बूलैंस घर के सामने रूकी रुकते ही डाक्टर और नर्सों की टीम तेजी से उतरी और अंदर आ कर पुछा ।किनको है तकलीफ सब ने भइया की ओर इशारा कर दिया ।काफी देर से इन्हें खांसी हो रही है नाक भी बह रही है और फिर बुखार भी तेज लग रहा है डाक्टर साहब….
डाक्टर तुरंत चेक अप करने लगे और कहा घबराने की कोई बात नहीं है मौसम बदलने के कारण इन्फेक्शन है ये दवाएं आप मरीज को टाइम से देते रहे दो तीन दिन में ठीक हो जाएंगे कोरोना का कोई लक्षण नहीं लग रहा है फिर भी सावधानी जरूरी है अभी कतई बाहर ना जाएं घर पर ही रहें ।जी डाक्टर साहब‌ भैया ने कहा। और वे चले गए ।
सबकी जान में जान आई पापा भी भईया पर बरस पड़े। क्या जरुरत थी लाक डाउन में बाहर‌ निकलने की ….. बार बार टी वी पर बताया जा रहा है फिर भी लापरवाही की हद होती है पापा कहते रहे और भईया सर झूका कर सुनते रहे । शायद उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा था कल रात में ही पी एम बताए थे की पुरे देश में रात से ही लाक डाउन शुरू हो जाएगा आप लोग 21 दिनो तक घर से बाहर ना‌ निकलें । और शाम होते होते पान मसाला खत्म हो गया और किसी भी चेतावनी की परवाह न करते हुए बाहर निकल गए।
बाहर से आने के कुछ ही देर बाद तबियत बिगड़ी और घबरा गए ……जरा सी बेवकुफी की वजह से सभी परेशान हो गए शुकर है भगवान का रिपोर्ट नेगेटिव आई और सबने चैन की सांस ली। भइया ने गलती कर तो दी
पर अब पछता भी साफ नजर आ रहा था भीगे गले से बोले अब लाक डाउन तक 21रोज तक बिल्कुल बाहर नहीं जाउंगा ,चाहे जो भी हो जाए ।
पछतावे की जगह दृढ़ निश्चय की चमक आंखों में नज़र आने लगी ।दृढ़ निश्चय ने उनकी घबराहट को काफी कम कर दिया था ।
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© गौतम जैन ®

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ग़ज़ल , कविता , हाइकु , लघुकथा आदि लेखन प्रकाशित रचनाएं:--- काव्य संरचना, विवान काव्य...
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