Aug 29, 2016 · कविता
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लाज बचा ले मेरे वीर

लाज बचा ले मेरे वीर

क्यों वेदना शुन्य हुई क्यों जड़ चेतन हुआ शरीर
अस्तित्व से वंचित हुआ कँहा खो गया शूरवीर
नही सुनी क्या चीत्कार क्यों सोया है तेरा जमीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – १

न ले परीक्षा अब मेरे धैर्य की बहुत हुआ अत्याचार
सहनशीलता दे रही चुनौती,कैसे न करू चीखपुकार
मिलकर लूटा जालिमो ने हुई शर्म से मे जीण-क्षीण
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – २

लांछन किसके सर मंढू सबी तो ठहरे मेरे लाल
भूल गए क्यों अपनी मर्यादा, जन-मानस बेहाल
कुछ तो लिहाज़ रखो शिष्टता का मत बेचो जमीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ३

रक्त रंजीत हु, अपने ही लहू से घायल हुआ बदन
असहाय सी ताकती हु कैसे संवारु फिर से तन-मन
भूल गया क्यों अपनी परिसीमा कँहा गया महावीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ४

मै दुखयारी हु बड़ी अभागन जन्मे कैसे सर्वनाशी सपूत
जात धर्म,ऊँच नीच,अमीर गरीब में बटगए सारे कपूत
ह्रदय विदारक दृश्य पनपता,शुष्क नैनों से छलका नीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर -५

फिक्र नही मुझे मेरे असितत्व की डरती हूँ तू क्या पायेगा
आँख गड़ाए दुशमन बैठे है जाने कब तुझको होश आयेगा
शक्ति है गर तुझमे,फिर क्यों मेरा पल-2 होता हरण चीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ६

टूट रही हु मैं थक रही हु कैसे झेलू बेटो के शव का बोझ
नेता बन गदारी करते, मुझे तिल-2 वो बेच रहे हर रोज़
किसके आगे दुखड़ा रोउ क्या फुट गयी मेरी तक़दीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ७

जग जननी, दुःख हरणी, बिन मांगे देती सुख अपार
ओजस्वनी,तेजस्वनी, लक्ष्मी-दुर्गा कैसी हुई लाचार
देख के देश की हालत मेरा हुआ जाता चित्त अधीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ८

कब से आस लगाए बैठी, कब होगा बेटा जवान
मत बन गूंगा मत बन बहरा नहीं अब तू नादान
उठा धनुष चढ़ा प्रत्यंचा,कमान में सजा संपूर्ण तीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – ९

आ गया वक़्त अब तुझको अपनी माँ का है कर्ज चुकाना
पराक्रम,प्रताप, वीरता, साहस का कौशल अब दिखलाना
धधकती ज्वाला इस माँ के मन में फिर तू राखे काहे धीर
पुकार रही तुझे धरती माता लाज बचा ले मेरे वीर – १०
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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
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