ललई तुम्हें करबद्ध नमन..

कब आओगे होश में बहुजन,
एक कभी तुम बन न सके ।
याद करो उस नायक को
जो व्यसन की ज़िंदगी जी न सके ।।

बहुत ज़ोर था मनु व्यवस्था का,
जीते जी उसका संहार किया ।
द्रविण सभ्यता का दक्षिण मैं रामास्वामी,
उत्तर में ललई ने उसका प्रचार किया ।।

बन करके बुद्ध के साधक वो,
जाति प्रथा का अंत किया ।
ख़ुद नाम से जाति हटा करके,
मनु विधान का पुरज़ोर विरोध किया ।।

आज का बहुजन है किस फेरे में,
उसको न दिखाई कुछ देता है ।
अपने महापुरुषों के क़ातिलों से,
घर-आँगन की शुद्धि करता है ।।

सोच “आघात” क्या गुज़री होगी,
जब अपना सब कुछ त्यागा होगा ।
वो भी सब कुछ पा सकते थे,
जिन छोड़ा सब अपनों के लिये ।।

*आर एस बौद्ध “आघात”*
अलीगढ़

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