.
Skip to content

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

गज़ल/गीतिका

October 23, 2017

(सबसे लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल)
काफ़िया=आ
रदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर*
1222×4

खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर,
सजा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वफ़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

नशा ये देश-भक्ति का, रखे चौड़ी सदा छाती,
अना मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रहे चोटी खुली मेरी, वतन में भूख है जब तक,
शिखा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

गरीबों के सदा हक़ में, उठा आवाज़ जीता हूँ,
सदा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रखूँ जिंदा शहीदों को, निभा किरदार मैं उनका,
अदा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

मेरी मर्जी तो ये केवल, बढ़े ये देश आगे ही,
रज़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रहे रोशन सदा सब से, वतन का नाम हे भगवन,
दुआ मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

चढ़ातें सीस माटी को, ‘नमन’ वे सब अमर होते,
कज़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया।

Author
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश... Read more
Recommended Posts
मेरी बेटी - मेरा वैभव
कविता मेरी बेटी - मेरा वैभव - बीजेन्द्र जैमिनी मेरी बेटी मेरी शान मेरी आनबान मेरी है पहचान मेरी बेटी - मेरा वैभव मेरी बेटी... Read more
जिंदगी मेरी अर्पण वतन के लिये ।
ग़ज़ल ज़िन्दगी मेरी अर्पण वतन के लिए ।। जान जाये तो अरि के दमन के लिए ।। सांस चाहे भले हो मिरी आखिरी । मै... Read more
अब वतन में हर तरफ ही प्यार होना चाहिए
ग़ज़ल ------------ अब चमन दिल का मेरे गुलजार होना चाहिए जिंदगी में अब ग़मे इतवार होना चाहिए -------?------- अब वतन में हर तरफ ही प्यार... Read more
लिख देना
नफरतों के बाजारों में तुम प्यार लिख देना बिखरती जुल्फ को मेरा सलाम लिख देना अगर लिखना है तुमको तो मेरी तुम बात सुन लेना... Read more