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लड्डू जैसे गालों वाली

शशांक तिवारी

शशांक तिवारी

गज़ल/गीतिका

June 15, 2017

मतभेदों के बीच हमारे , जागा है इक भाव प्रिये !
इन आँखों में दिखता मुझको , इक प्यारा ठहराव प्रिये !!

और तुम्हारे गानों में है , कुछ ऐसा आभास प्रिये !
जैसे कृष्ण की मुरलीवाला , मथुरा सा एहसास प्रिये !!

‘ लड्डू जैसे गालों वाली ‘ ने , अधरों में भंग भरे हैं !
तिरछी मुस्कानों के पीछे , बोलो किसके रंग चढ़े हैं ??

– शशांक तिवारी

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