लडुआयन के दिन

( लडुआन के दिना )

आज बन हैं लडुआ,
और कल हम खायें,
और मजा उडा़ये,
कछु कुर कुरायें,
और कछु चररायें,
सबरें मजा उडा़यें,
घर घर में जे बन रऐ,
जिनसे हाथ भिड़ जाये,
सुबह उठ खाँ हैं,
और मोज मनाये,
उठा के हाथ में लायें,
खात चले आये,
बोलो तुम्हें बता हैं,
घर रहे या बहार जाये,
संग यही परसे आये,
खाँओ नहीं इनको तो,
ये वापिस नहीं जाये,
चाहे कोई शामिल हो जाये,
ये कभी बच नहीं पाये,
ज्यादा समय रूक गये तो,
ये भिस भिसायें,
खाँ ले कोई कितने ही,
ये कम पढ़ जाये,
इनकी माया बतायें,
पूँछों जिससे वही बतलाये,
मैने कम इन्हें खाँयें,
आज बन हैं लडुआ ,
और कल हम खाँयें,
ऐसों मजा उडा़ हैं,|

लेखक—Jayvind singh

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