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लङे गजानन

विप्लव छाया गगन सरीखे
सुर असुर घमसान अपर्यत
अशक्त हुए देव दिखे
सर खड़े दानव अत्रस्त

चंद्र टकराए चंद्र से सूर्य से सुर्य.
देवालय त्राहि मची, दानुज चढे धुर्य.
महादेव तनम्य ताँडव में
लड़े गजानन बन भट वर्य.

दानवों की सेना खड़ी
खड़े इकनोते लंबोदर वीर
पछाड़ पछाड़ ताड़ा सबको
किये प्रभीत असुर अधीर

विजयी हुए पार्वती-नंदन
देव नमित करें अभिनंदन
वैकुण्ठ जय जय कार हुआ
सृष्टि करे गणपति वंदन

देवेन्द्र दहिया- अम्बर
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शब्दार्थ

अपर्यत – अत्यंत, असीम
अत्रस्त – निर्भीक, निडर
सुर्य व चंद्र – दानु के 40 असुर पुत्रों में से दो के नाम हैं
धुर्य – विष्णु
भट – लहाका
वर्य – प्रमुख
तनम्य – मग्न, लीन
नमित – झुककर
प्रभीत – अत्यंत भयभीत

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