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"लघु कविता"

“लघु कविता”
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नये घाव की
क्या है जल्दी
पुराना तो भरने
दो अभी
उमर है
जो भी बाकी
मिल जायेगा
नसीब में
घाव ही तो है
दे देना
जी चाहे
जब भी
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राजेश”ललित” शर्मा
१९-३-२०१७

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राजेश शर्मा
राजेश शर्मा
New Delhi
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