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“लघु कविता”

राजेश

राजेश"ललित" शर्मा

कविता

March 19, 2017

“लघु कविता”
——————-
नये घाव की
क्या है जल्दी
पुराना तो भरने
दो अभी
उमर है
जो भी बाकी
मिल जायेगा
नसीब में
घाव ही तो है
दे देना
जी चाहे
जब भी
——————–
राजेश”ललित” शर्मा
१९-३-२०१७

Author
राजेश
मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और... Read more
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