लघु कथा

लघुकथा

मेहनत की रोटी

आज विद्यालय में सभी विद्यार्थी अपने अपने घर से स्वादिष्ट भोजन लेकर आए। गुरुजी ने सबका भोजन देखा और बोले आज तो सब मजेदार डिश लाये हैं। कोई मिठाई कोई पुड़ी कोई रसगुल्ले, कोई नमकीन ,कोई हलवा । अरे वाह बच्चों आराम से भोजन का आनंद लो।
गुरुजी ने अपनी बात समाप्त की थी ही कि अरविन्द बोला गुरुजी गोपाल की थाली भी देख लीजिए। गुरुजी ने गोपाल की थाली देखी और रोटी का स्वाद चखा। गोपाल आज मक्का की रोटी और सरसों का साग लाया था। गुरुजी ने रोटी साग खाई तो खाते ही रह गए।
सारे बच्चे देखते रह गए। सब बोले गुरुजी यह क्या हमारे पास की स्वादिष्ट चीजों को आपने चखा तक नहीं और गोपाल की रोटी खा रहे हो गुरुजी।
गुरुजी ने गोपाल से पूछा ये मक्का का आटा कौन लाया । वह बोला माँ मजदूरी करने जाती है वहीं से मक्का मिली जिसे हाथ चक्की(घट्टी) पर पीसा है। अच्छा तभी इसका स्वाद बहुत अच्छा लगा।
गोपाल बोला ये मेहनत की रोटी है गुरुजी। गुरुजी गोपाल का मासूम चेहरा देखते रह गए।
– कवि राजेश पुरोहित
98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी पिन 326502 जिला झालावाड़
राजस्थान

Like Comment 0
Views 14

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share