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लग गई किसकी नजर…..

Ankita Kulshreshtha

Ankita Kulshreshtha

कविता

August 1, 2016

परत चढ रही है,
अवसाद की,
प्यार पर,
पङ गयी किसकी नज़र,
जो था गवाह मेरी
अठखेलियोँ का,
खो गया कहाँ वो शहर,
रुठी क्योँ है जिन्दगी
किसलिए चुपचाप है,
क्या पता कब तक चलेगा
ये उदासी का पहर..
कब छिङेगी रागिनी प्यार की
फिर से,
फिर से मिलेगी जिन्दगी ..
कौन जाने कब थमेगा
मेरी मायूसियोँ का सफर.,.
मैँ करुँ या ना करुँ
इन्तज़ार,,
मेरी खुशियाँ पूरी होने का..
मेरी दुनिया पूरी होने का..
नहीँ खबर..
पर आस बांध के रखी है
तेरे प्यार पर.. ”

(अंकिता)

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Author
Ankita Kulshreshtha
शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|

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