" लगे जीत फहरे " !!

मुस्कानों में खोये ,
राज बड़े गहरे !!

आनन की रंगत तो ,
आनी जानी है !
ठहर गई जो लब पर ,
वही कहानी है !
अँखियों ने बैठाये ,
यहाँ वहाँ पहरे !!

चंचल धारे जैसे ,
बहते हो बहना !
लाज शरम का तुमने ,
पहना जो गहना !
पुलक गात पर छाये ,
हैं भाव रुपहरे !!

शोखी और शरारत ,
तुमने धार लिये !
जग भूले हैं हम तो ,
सब कुछ हार दिये !
लहराते जब कुंतल ,
लगे जीत फहरे !!

मुट्ठी बंद किये हो ,
बंकिम लिये अदा !
नखरे नाज़ सदा ही ,
सबसे लगे जुदा !
कौन जुटाये साहस ,
आ सम्मुख ठहरे !!

स्वरचित / रचियता :
बृज व्यास
फरीदाबाद

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 5

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share