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लगा, गलत हूँ! ?

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

July 24, 2017

पता चली जो गलत लिखाई, लगा गलत हूँ
तुमने हटा आरी सी चलाई, लगा गलत हूँ।
पता चला की भटक गया हूँ, लगा गलत हूँ
तुमने सच्ची राह दिखाई, लगा गलत हूँ।

भूल गया था तुम मालिक हो, मैं सेवक हूँ
कर गया सीधेमन चतुराई, लगा ग़लत हूँ
लगा लिखा कुछ राष्ट्रविरोधी? क्या ऐसा था?
देख तुम्हारी तानाशाही, लगा गलत हूँ।

– नीरज चौहान

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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