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लगता क्यूँ हर आदमी गद्दार है

बबीता अग्रवाल #कँवल

बबीता अग्रवाल #कँवल

गज़ल/गीतिका

December 8, 2016

करती हूँ मुहब्बत तुम्हीं से जान लो
डरती नहीं के जीत हो या हार है

ग़म नहीं जहाँ मे किसी का साथ हो
मिल जाए मुझको गर तेरा ही प्यार है

खुद से ही पूछीये के क्या बात है
हो गई तुमको मुहब्बत इक़रार है

आशिक़ तो दिल आपका ही हो गया
फिर न कहना कँवल से अपनी हार हैं

गिरहबंद-
लगता क्यूँ हर आदमी गद्दार है
आजकल हर दिल फ़क़त तकरार है

Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
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