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लंबे चौड़े दिखें, किंतु है खाली बक्सा

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कविता

April 9, 2017

(मुक्त छंद)

“नायक” आधी मुड़ाकर, मार रहे हैं धाँक|
ना सज्जन से दिख रहे, ना गुंडा की बाँक||
ना गुंडा की बाँक ,बने आधे मुछमुंडा|
फिरहुँ कह रहे हम हैं राजा भैया कुंडा||
कह ‘नायक’ कविराय देख लो इनका नक्शा|
लंबे चौड़े दिखें, किंतु है खाली बक्सा||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता चाहिए

09-04-2017

एक कवि द्वारा मूँछो बाले कवि की तारीफ़ एवं बिना मूँछ बालों पर व्यंग करने पर इस मुक्त छंद का निर्माण हुआ|
जिन कविवर ने बिना मूछ बालों पर व्यंग्य पढा था, वह आधी मूँछ रखे हुए थे|

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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