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रोला छंद…..

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

November 15, 2017

रोला छंद
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कभी किसी का हृदय,मत दुखाना सुन यारा।
तू ख़ुदा से कम ना,सभी का होगा प्यारा।
फूल-सी ख़ुशबू दे,जग से बनेगा न्यारा।
मेरा प्यार उमड़े,तुझी पर सारा यारा।
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मोहब्बत कर देख,इसमें ज़िंदगी है रे।
टूटा अगर पत्ता,न उम्दीगी है रे।
इंसानियत अपना,यह तो सादगी है रे।
इंसानो से घृणा,यार दरिन्दगी है रे।
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दिल में चिराग जला,मुहब्बत का यूँ यारा।
दिवाली-रात-हँसे, दीपों का ले सहारा।
मानव मन बदलके,प्रेम की बहती धारा।
देखूँ जिसदिन यहाँ,स्वर्ग होय वो नज़ारा।
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राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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