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रोता बोल पडा़

vinay pandey

vinay pandey

कुण्डलिया

February 14, 2017

वो रोता रोता बोल पडा
मेरा भी कब है मोल पडा
सुख चैन तुम्हारे लेता हूँ
तब पल राहत के देता हूँ

जब होती बातें चाहत की
तब मिलती साँसें राहत की
जब जज़बातों मे बहता हूँ
तब आँखों से सब कहता हूँ

आँखों के आँसू पीता हूँ
मैं दिल हूँ दिल मे जीता हूँ
मरता मुझको जब पाओगे
खुद जीते जी मर जाओगे

अब राजन खुदमें खोज मुझे
तब चैन मिलेगा रोज मुझे
जब खुद मे मुझ को पाएगा
तब गीत खुशी के गाएगा

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Author
vinay pandey
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