रोटी

आज जब पूछा-
एक कामगार से
‘रोटी’ की व्यवस्था है न
मै हूँ चिंता मत करना.
अभी तो है,
आगे भगवान मालिक
आपने पूछा
समझो रोटी मिल गई,
मेरी बाछें खिल गईं,
और-
बड़े भोलेपन से,
‘लॉकडाउन’ को
‘लॉफडाउन’ बताया
आभार जताया.
मुस्कराने की बारी मेरी थी,
शायद
उसने मुझे
बदले में अधिक दे दी.
—–
– डॉ. सूर्यनारायण पाण्डेय
21.04. 2020

2 Comments · 11 Views
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर'...
You may also like: