मुक्तक · Reading time: 1 minute

रोटी दो

भूख लगी है रोटी दो। (खाना दो)
अधिक नहीं बस रोटी दो।। (2 रोटियां)
खुद के हाथों ही खा पाऊं;
मुझको रोजी रोटी दो।। (जीविका)

रोटी बेली पोई दो। {हथपोई रोटी)
सब्जी सूखी पोई दो।। (पोई की सब्जी)
भूखे को कच्ची क्या पक्की।।
या आटे की लोई दो।।

@कौशल

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कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि ग्राम- मतरी बर्मेन्द्र, तहसील- उंचेहरा, जिला- सतना (म.प्र.) का मूल निवासी हूँ। वर्तमान में राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-बल्देवगढ़, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा…
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