मुक्तक · Reading time: 1 minute

” रोटी को देख “

किसी ने कहा था दिलों के रिश्ते तव पर सिकती रोटी की तरह होते हैं ,
फर्क सिर्फ इतना है !
रोटी को जलाने वाला आग है ,
रिश्तों को जलाने के लिए एक गलतफहमी बहुत है ।

– ज्योति

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