रेडीमेड नुस्खा

रेडीमेड नुस्खा (लघुकथा)
बनवारी लाल मस्ती में झूमते हुए मार्निग वाॅक कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात परम मित्र सूरजमल जी से हुई, जो कुछ परेशान दिख रहे थे।
बनवारी लाल ने पूछा- क्या बात है, मल्लू आज कुछ परेशान दिख रहे हो ? चूँकि सूरजमल बनवारी लाल से उम्र में चार- छः वर्ष छोटे थे तो बनवारी लाल अपने दोस्त को प्यार से मल्लू कहकर बुलाते थे।
सूरजमल ने कहा- क्या बताऊँ, कुछ समझ नहीं आ रहा ? मुसीबतें हैं कि पीछा ही नहीं छोड़तीं। हाथ धोकर पीछे पड़ी हुई हैं। आजकल मन बहुत अशांत रहता है। समझ में नहीं आता कि क्या करूँ? मुसीबतों से कैसे पार पाऊँ?
बनवारी लाल बोले – मैं ये तो नहीं पूछूँगा कि तुम्हारी क्या परेशानी है। पर मैं परेशानी का हल अवश्य बता सकता हूँ। हर समस्या की रामबाण औषधि है। तुम कहो, तो बताऊँ?
सूरजमल को तो जैसे भगवान मिल गए हों। बोले, नेकी और पूछ- पूछ।फटाफट बताओ मित्र।
बनवारी लाल ने कहा- तुम थोड़ा समय निकालकर साहित्य पढ़ा करो। समय भी कट जाता है, और समस्याओं का समाधान भी मिलता है।
बनवारी लाल की बात सुनकर सूरजमल और दुखी हो गए और बोले ये झमेला मैं नहीं पाल सकता। पहले पढ़ो, फिर समझो। इतना वक्त कहाँ है, कोई शार्टकट बताओ ?
सूरजमल ने कहा- सिविल लाइन्स के ‘विद्या बुक स्टोर’ पर जाना, वहाँ अमीर बनने के अचूक नुस्खे, व्यक्तित्व को कैसे निखारें, अच्छा पति कैसे बनें, अच्छा बेटा कैसे बने आदि आदि किताबें मिलती हैं, जो आपकी समस्या हो उसके अनुसार किताब खरीद लेना। तुम्हें आनंद और खुशी नहीं चाहिए। तुम्हें तो समस्या के लिए रेडीमेड नुस्खे चाहिए और वह इसी तरह की पुस्तकों में मिलते हैं।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

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