रेखाओं के खेल

लक्ष्मण रेखा तोड़कर सिया के उर थी पीर
रेखाओं के खेल ये कौन बंधाता धीर
कुछ हद तक बंधन भी उचित हुआ करते हैं
आज तो मानव खुद लिख रहे अपनी तकदीर।

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poet and story writer
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