मुक्तक · Reading time: 1 minute

रूह का हिस्सा

आंख के आंसू है……दरिया नहीं
जो सूख जायेगा

तुम उतार फेंको मुहब्बत का लिबास

ये मेरी रूह का हिस्सा है ………
मेरे संग जायेगा

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