रूही स्नान

ये मुस्कराहट
ये अदा
जी चाहता है
शाल सा लपेट लूँ
गुनगुनी गर्माहट के लिए।

तुम मुस्कराती रहो
और इस ऊर्जा में
सराबोर होते रहूँ उम्र भर।

तुम्हारी भीनी भीनी
देशी गुलाब की महक से
जिंदगी की बची सांसें महकती रहें, महकती रहें

कभी मेरे भीतर उतरना
बहुत गहराई में
सिर्फ और सिर्फ
एक चाहत का दिया
जलता है
जिसकी रोशनी
तुम हो।

मेरा अँधेरा ह्रदय
जमाने के पहनाये तंग कपड़ो
को उतारकर
नहा रहा है
तुम्हारी रौशनी से।

,,,,लक्ष्य
8/9/2016

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