कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

#कुंडलिया//अल्हड़

अल्हड़ सुंदर रूप यह , दिल में उतरे देख।
कागज़-सा है साफ़ मन , अनुपम है चितलेख।।
अनुपम है चितलेख , बात कोयल-सी करती।
लहरें ज्यों तट चूम , रूप मोती का भरती।
सुन प्रीतम की बात , रहे कोई कैसे जड़।
चाहत भरता रूप , मिला जो तुमको अल्हड़।

#आर.एस. ‘प्रीतम’

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