गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

रूठ कर यूँ हमें मत सताया करो

रूठ कर यूँ हमें मत सताया करो
प्यार हैं हम हमें तुम मनाया करो

ये सुना है बड़े कामकाजी हो तुम
आँसुओं की भी कीमत लगाया करो

जी रहे हैं यहाँ बस तुम्हें देखकर
रुख से पर्दा कभी तो हटाया करो

तुम अँधेरे मिटाने हमारे लिये
चाँद पूनम का बन जगमगाया करो

साथ बेटों के भी अब सुनो साथियों
बेटियाँ खूब अपनी पढ़ाया करो

जब भुला तुमने हमको दिया ‘अर्चना’
ख्वाब में भी हमारे न आया करो
डॉ अर्चना गुप्ता

8 Comments · 255 Views
Like
1k Posts · 1.3L Views
You may also like:
Loading...