रूठा हुआ है यार मना लेना चाहिए

रूठा हुआ है यार मना लेना चाहिए
मौक़ा मिले गले से लगा लेना चाहिए

किरदार ही है काम का दुनिया में आजकल
किरदार मेहनतों से बना लेना चाहिए

गुलशन में दिल के सबको ज़माने में आज के
इन्सानियत का पेड़ लगा लेना चाहिए

जोड़ें न दिल किसी का तो इतना करो जनाब
टूटे न दिल किसी का निभा लेना चाहिए

नेमत ख़ुदा की एक है मुस्कान लब पे हो
ग़म को छुपा के ख़ुद को हंसा लेना चाहिए

ख़्वाहिश अनेक नेक हों हमदर्दियाँ भी हों
दिल के चमन को रोज़ सजा लेना चाहिए

खुलकर हंसो हंसाओ ज़माने को भी कभी
गुस्सा मगर तमाम दबा लेना चाहिए

रंगीन ज़िन्दगी है कई रंग इसमें हैं
हर हाल ज़िन्दगी का मज़ा लेना चाहिए

मुश्किल भले जवाब हों हिम्मत न हारनी
‘आनन्द’ हर सवाल लिखा लेना चाहिए

– डॉ आनन्द किशोर

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