Skip to content

“रुदन” गीत

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

गीत

August 5, 2017

(६) “रुदन”
**********
पुरानी याद के धुँधले कदम जब राह में आते
कसक मन में रुदन करती तुम्हें हम चाह में पाते।

ठिठुरती सर्द रातों ने जगाया स्वप्न में खोया
अगन बढ़ती गई तन की झुका पलकें बहुत रोया
भिगोया रात भर तकिया सनम को भूल ना पाते
पुरानी याद के धुँधले कदम जब राह में आते…।

कहूँ कैसे ज़माने से जुबाँ पर आज पहरे हैं
भरा है दर्द सीने में समेटे ज़ख्म गहरे हैं
कहाँ जाऊँ बता दे तू अँधेरे रात गहराते
पुरानी याद के धुँधले कदम जब राह में आते…।

ढह गए प्यार के सपने बिछे जब शूल राहों में
जली अरमान की बस्ती रहे ना फूल बाहों में
मरुस्थल बन गया जीवन मुझे अरमाँ नहीं भाते
पुरानी याद के धुँधले कदम जब राह में पाते…।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
महमूरगंज, वाराणसी (उ.प्र.)

Share this:
Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
Recommended for you