गीत · Reading time: 1 minute

#गीत//रुत आए मन को भा जाए

गर साथ निभाना आ जाए , गर प्यार दिलों में छा जाए।
स्वर्ग जमीं पर ही होगा तब , रुत आए मन को भा जाए।।

जब मन मंदिर बन जाता है , तब तन निर्मल हो जाता है।
हर कोई अपना लगता है , मानव मोहब्बत रचता है।
जब दिल से निकलें भाव कहीं , तब हर बात मज़ा दे जाए।
स्वर्ग जमीं पर ही होगा तब , रुत आए मन को भा जाए।।

जब व्यवहार ख़रा होता है , तब क़िरदार ख़रा होता है।
जब धोखा मन में आता है , तब मन बंजर हो जाता है।
हाथ मिले हर बात मिले गर , संकट आए हल हो जाए।
स्वर्ग जमीं पर होगा तब , रुत आए मन को भा जाए।।

आशाओं की मन भौर रहे , रिश्तों की बंधी डोर रहे।
अपना फ़र्ज़ निभाएँ सारे , जैसे सूरज चाँद सितारे।
दीप प्रेम का जलता जाए , चारों ओर उजाला छाए।
स्वर्ग जमीं पर होगा तब , रुत आए मन को भा जाए।।

गर साथ निभाना आ जाए , गर प्यार दिलों में छा जाए।
स्वर्ग ज़मीं पर होगा तब , रुत आए मन को भा जाए।।

#आर.एस.प्रीतम

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