रिश्तों का रंग

कहकहों में बदली है सिसकियां हमनें
तोड़ डाली क़फ़स की तीलियां हमनें

सगे रिश्तो का भी अब रंग बदला है
रोकी नहीं नफरत की आंधियां हमने

तअस्सुब की चिंगारी ने जला डाला
बनाई थीं अम्न की झोपड़ियां हमने

फिरंगी उन्हें क्या अपने साथ ले गए?
देखी नहीं है दूध की नद्दियां हमनें

आमाल को बुलंद करने में लगे हैं
हटा दीं बड़े नाम की तख्तियां हमने

क्या फिर कोई शिकस्ता दिल टूटा है?
कड़कती देखी है बिजलियां हमने

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