हाइकु · Reading time: 1 minute

*रिश्तों में दरार*

मन आई खिन्नता
बढ़ती गई भिन्नता
लुप्त हुई प्रसन्नता
रिश्तों में पड़ी दरार||1||

अपने-पराये अनजाने
आने लगे ताने-बाने
देने वाले जाने-माने
रिश्तों में पड़ी दरार||2||

अंतर मतभेद हो
बुद्धि न सचेत हो
अंधानु विभेद हो
रिश्तों में पड़ी दरार||3||

वाहवाही जय जयकार
दुनिया का चमत्कार
थोड़ा आया अहंकार
रिश्तों में पड़ी दरार||4||

बन जाये गुदड़ी लाल
अगर कोई फटेहाल
करले जीवन निहाल
रिश्तों में पड़ी दरार||5||

‘मयंक’ पड़े सब उनके पीछे
ऊपर आए थे जो नीचे
टाँग उनकी सब खींचें
रिश्तों में पड़ी दरार||6||

✍ के.आर.परमाल ‘मयंक’

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