रिश्तों के कारोबार में

रिश्तों के कारोबार में,
अक्सर हार जाते है कुछ लोग,
उलझ जाते है ,
भावनाओं के नगद और उधार में ,
अक्सर समझ नहीं पाते,
इच्छाओं के बहीखाते और हिसाब को,
क्यों चुप है कोई,
नाराज़ है या परेशान है
या छिड़ी अपनी ही धुन की कोई तान है
क्यों किसी की आंखें नम दिल बेहाल है,
दिल दुखा है या दुखाया किसी और ने है
समझ जाना हर भावना को ,
कहाँ आसान है?
किसी का दिल समझ लेना,
या पढ़ लेना चेहरा किसी का,
हर किसी के बस में कहाँ यह बात है
इसलिए हार जाते अक्सर कुछ लोग,
रिश्तों के कारोबार में,
भावनाओं के नकद और उधार में ….

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