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रिश्ते

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अब रिश्ते बस नाम के रह गये हैं,
अब रिश्ते हाय-हेलो में सिमट गये हैं,
ये नया जमाना है,
अब तो लोग रिश्ते सिर्फ फोन पर निभाते।
कौन टूट रहा है, कौन छूट रहा है,
ये जानने के लिए वक्त कहाँ पाते हैं।
मत करिए शिकायत रिश्तों की,
वरना ये धागे भी छूट जायेगें।
रिश्तों की बुनियाद में
सब अपने रूठ जायेगें।
मत कीजिए किसी से आस,
बस करिये खुद पे विश्वास।
जो होगें अपने लौट आयेगें,
जो हैं पराये वो रिश्ते तोड़ जायेगें।
बीच भँवर में आपको अकेले छोड़ जायेगे।
लाख आवाज दो वो नहीं आयेगे,
ये नये जमाने का रथ
बस दौड़ रहे हैं, ये दौड़ते चले जायेगे।
ये हर रिश्तों को, रौंदते चले जायेंगे।
जब थक जायेगें, तब ये शायद सोचेंगे,
क्या इन्होंने खो दिया, तब सोच के रोयेगे।
???—लक्ष्मी सिंह ?☺

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लक्ष्मी सिंह
लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली
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