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रिश्ते

Shubha Mehta

Shubha Mehta

कविता

August 22, 2016

बडे़ अजीब होते हैं रिश्ते
कुछ बने बनाए मिलते हैं
तो कुछ बन जाते हैं
और कुछ बनाए जाते हैं
स्वार्थ पूर्ती के लिए
कैसे भी हों,आखिर रिश्ते तो रिश्ते हैं
बडे नाजुक से……
सम्हालना पडता है इन्हे
बडे जतन से
लगाना पडता है
“हेंडल विद केयर”का लेबल
वरन टूट कर बिखरने का डर
और चटक गये तो ….
ताउम्र सहनी पडती है
कसक घाव की
कोई मरहम काम नही आता
शायद समय के साथ गहराई
कम हो जाती है
पर,छोड जाती है निशाँ
. देख कर जिन्हें
टीस सी उठती है
करनी पडती है भरसक कोशिश
छिपाने की इन्हे
बडे़ अजीब होते हैं………ये रिश्ते।

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Author
Shubha Mehta
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