.
Skip to content

रिश्ते

DrDinesh Bhatt

DrDinesh Bhatt

गज़ल/गीतिका

December 25, 2016

*****************************
विधा-गीतिका
आधार छन्द-विधाता
मापनी-1222 1222 1222 1222
समान्त-आर पदान्त-को देखा
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
सदा रिश्तों की चौखट पर बिलखते प्यार को देखा
महज धन के लिये रोते दुखी संसार को देखा।

नहीं उपलब्ध गाँवों में चिकित्सा और शिक्षा है
पलायन के लिये मजबूर हर लाचार को देखा।

कभी संस्कार से परिपूर्ण थी शिक्षा पुरानी जो
उसी के आधुनिक बढ़ते हुये व्यापार को देखा।

हमेशा माँ पिता की जो करें सेवा खुशी मन से
सदा खुशियों भरे उनके सुखी घरबार को देखा।

हमारे पूर्वजों ने जो बनाई थी बड़े श्रम से
उसी संस्कार की ढहती हुई दीवार को देखा।

कहीं मिलता नहीं अब शुद्ध भोजन दूध या पानी
मिलावट के जहर से बस भरे बाजार को देखा।

डॉ. दिनेश चंद्र भट्ट

Author
DrDinesh Bhatt
Recommended Posts
शब्दों को बतियाते देखा....
(गीतिका) ****************************** * शब्दों को बतियाते देखा, सारा जग हथियाते देखा । * स्नेह सुरों की बलि दे डाली, कर्कश बन चिचियाते देखा । *... Read more
सत्य को हारते देखाहै, दर्द को जीतते देखा है, वक्त को बदलते देखाहै, सम्मान का समर्पण देखाहै , रंग बदले गिरगिट देखा है, हाँ!मैने छल-... Read more
वफ़ा करना, न कर पाओ तो' मत आना
छंद- सिंधु मापनी- 1222 1222 1222 चले जाना अभी आए अभी जाना. तुम्‍हे जी भर के’ भी देखा नहीं जाना*. जरा ढलने तो' दो दिन... Read more
धरती
धरती मैंने उसको जब भी देखा, खिलते देखा उजड़ते देखा बहकते देखा महकते देखा हंसते देखा रोते देखा स्वर्ण सुरभि छेड़ते देखा पर इसको जब................ Read more