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राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

February 18, 2017

राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो
क्यों न हार का स्वागत हौसलों से करते हो

इस तरह बदल ली है अपनी आपने सीरत
झूठ की वकालत भी आइनों से करते हो

हाथ कुछ न आया औ चैन भी गँवा बैठे
होड़ इतनी क्यों ज्यादा दूसरों से करते हो

दूर तुम करोगे इस ज़िन्दगी के तम कैसे
रौशनी ही जब इसमें जुगनुओं से करते हो

दिख रही हैं बाहर से खोखली ही दीवारें
बात ‘अर्चना’ फिर क्या चौखटों से करते हो

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद (उ प्र)

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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