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# राहें #

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 30, 2017

राहों से सीखा मैंने
अकेले ही आगे बढ़ना।
मंजिल पर पहुंच
कर ही रुकना ठहरना।
बीच में कहीं
न रुकना न बहकना।
रास्ते में खुश
रहना चहकना।
पूरे सफर भर में ऐ दोस्त
फूलों की तरह महकना।
राहों से सीखा मैंने
अपनी मंजिल पाकर ही थमना।

—रंजना माथुर दिनांक 30/09/2017
मेरी स्व रचित वह मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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