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राहें

Raj Vig

Raj Vig

कविता

February 3, 2017

खुद ब खुद
बदल गयी हैं राहें
मंजिल का पता
बता रही हैं राहें
जाना था किधर
कहां जा रही हैं राहें
मुश्किल थी बहुत
आसान हो गयी हैं राहें
देखे न थे जो ख्वाब
हकीकत बना रही हैं राहें
किसी के पास किसी से दूर
ले जा रही हैं राहें
मुस्करा रहा है तन मन
महक रही हैं राहें
मिलेगा मुकद्दर यहीं पर
वादा निभा रही हैं राहें ।।

राज विग

Author
Raj Vig
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