राहें तो थी बहुत हमीं पीछा न कर सके

राहें तो थी बहुत हमीं पीछा न कर सके
किस्मत के मारे पूरा भी सपना न कर सके

बातों से तो रिझाते रहे खूब तुम हमें
पूरा मगर कभी कोई वादा न कर सके

तुमने तो पल में छोड़ दिया था हमारा हाथ
हम आज तक भी तुमको पराया न कर सके

यूँ हमने तुमको ज़िन्दगी से दूर कर दिया
यादों से पर तुम्हारी किनारा न कर सके

हँसते तो ‘अर्चना’ रहे पर आँखें रो पड़ीं
हम तो खुशी का भी कोई दावा न कर सके

11-07-2019
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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