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राष्ट्र – वन्दना

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

गीत

August 6, 2016

हे!वन्दनीया हे!वत्सलाय
नमामि भारत वसुन्धराय
प्रसून पुष्पित सुवास मलयज
हिलोर सागर सुदर्शनाय
अगम्य गगनम् सुरम्य सरिता
निनाद कल-कल हिममंडिताय
अरण्य कलरव आरुण्य अञ्चल
प्रफ्फुल्ल जीवन सनातनाय
अनूप सुष्मित ललाम सन्ध्या
सुगीत विदिशा सुमंगलाय
स्वदेश कण-कण प्रभाष चित्रण
अनन्त रूपा मनोहराय
अनन्य भाषी विभिन्न धर्मा
समस्त वसुधा कुटुम्बकाय
नमो नमस्ते नमो नमस्ते
सत्यम् शिवम् हे! सुन्दराय
हे! पुण्य भूमे हे! कर्म भूमे
जय जन्म भूमेःः विश्वम्भराय

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Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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