राष्ट्र-भक्ति गीतिका

शस्य-श्यामला इस धरती को ,
बारम्बार प्रणाम है ।

हरे-भरे-से इन खेतों को ।
मरुस्थलों की भी रेतों को ।
पर्वत,सागरऔर नदियों को।
बीती गौरव की सदियों को ।
मंदिर , मस्ज़िद ,गुरुद्वारों को,
सज़दा और सलाम है ।

सिद्धों की इस सरज़मीन को ।
वुद्धों के विज्ञान – ध्यान को ।
संत ,फक़ीरों और भक्तों को ।
वीरों के भी स्वाभिमान को ।
मज़दूरों कृषकों को वन्दन ,
जिनका श्रम निष्काम है ।

शस्य-श्यामला इस धरती को,
बारम्बार प्रणाम है।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी।

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