Jan 24, 2018 · दोहे

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर
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घर की शोभा बेटियाँ,दो दो कुल की लाज !
सबको होना चाहिए , इसी बात पर नाज !!

छोड़ रही हर क्षेत्र में , आज बेटियां छाप !
कहने वाले क्यूं कहें, कन्या को अभिशाप !!

क्यों ना उन्नत शीश हो, क्यों ना होवे नाम !
कर जायें जब बेटियाँ,….बेटों वाले काम !!

उत्तरदायी कौन है, …….किसकी है ये भूल।
सिमटी हैं कलियाँ अगर, खिले नहीं हैं फूल।।
रमेश शर्मा.

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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !...
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