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राष्ट्रहित सर्वोपरि!

Anil Shoor

Anil Shoor

कविता

December 5, 2016

एक कर्मचारी कुछ गलत करे तो विभागीय कार्यवाही..निर्वाचित सरकार के लिए चुनावी पराजय..न्यायधीश कोई अनाचार करे तो महाभियोग..अभिनेता के लिए फिल्म फ्लॉप.. खिलाड़ियों की गलती पर करारी हार…..अर्थात ‘व्यवस्था’ में कुछ अनुचित करने या ‘गलती पर भी’ सबके लिए कुछ न कुछ ‘प्रावधान’ मौजूद हैं!

फिर देश की सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर हद दर्जे की “गैर-जिम्मेदराना रिपोर्टिंग के लिए” विधिपूर्वक निर्वाचित अपनी ही सरकार द्वारा “बस..एक दिन बन्द!” का ‘प्रतीकात्मक सन्देश’ दिए जाने पर..इतनी हायतौबा क्यूं मच गई है?..’मीडिया’ क्या करोड़ों नागरिकों द्वारा निर्वाचित विधानमंडल,न्यायपालिका तथा अपने देश से भी ऊपर है?..इसपर कोई नियम क्यों नही हो सकते?

स्वाधीनता-संघर्ष से लेकर आज तक लाखो-करोड़ों देशवासियोँ के खून-पसीने से सिंचित हमारा महान लोकतंत्र इतना कमजोर हरगिज नही है कि किसी एक ख़बरिया चैनल को गैर जिम्मेदाराना कार्य के लिए ‘एक दिन बन्द’ किए जाने से..यह नष्ट हो जाएगा! फिर ज्यादा ही दिक्कत हो रही है तो न्यायालय तो बन्द नही हो गए..वहां जाइए ना!

सबको यह साफ़ हो जाना चाहिए कि राष्ट्रहित सर्वोच्च है.. इससे ऊपर कोई नहीं..मीडिया भी नही..

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Anil Shoor
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