Oct 7, 2019 · कविता

रावण मरा नहीं करते

रावण मरा नहीं करते
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रावण एक महा योद्धा
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बहन की रक्षा हेतु, जिसने तलवार उठाई थी
लाश देख कर दुश्मन की भी, आंखें भर भर आयीं थी
ज्ञानी था वह नहीं घमंडी, वह पहला वैज्ञानिक था।
प्रकृति का रक्षक था वो, बिल्कुल नहीं अभिमानी था
दुश्मन की पत्नी भी जिसने, सुरक्षा घेरे में राखी
रोज पूछता हाल-चाल नीति साफ सुथरी राखी
फिर भी ना जाने क्यूं रावण को, इतना ज्यादा बदनाम किया
*मुझे बताओ उस योद्धा ने, कौन सा ऐसा पाप किया?*
रोज लूटता था जो जवानी, मदिरा की मदहोशी में
सोते जगते जो रहता था, कामुकता बेहोशी में
उसे भगवान इंद्र बताया जो पहला बलात्कारी था
घमंड क्रोध कामुकता का, जो पक्का भंडारी था
पर रावण ही गलत बताया ,जाता क्यूं हर बार
इंद्र से भी बुरा था क्या वो, जो जलता हर बार
मैं *रावण* को सच कहता हूं, जो आता हर बार
नहीं मरेगा सच कभी भी, करते रहो संहार
*बोलो रावण की जय*……
ना रावण ने हिरण मारा, ना काटे किसी के नाक कान
दुर्लभ पर कभी उठाए नहीं, उसने अपने तीर कमान
ना भाई से भाई को मरवाया,
ना पत्नी को कभी सताया था
फिर भी रावण के हिस्से में,
ये कलंक चला आया था
*झूठ और अन्याय के आगे, जो ना कभी झुका करते।*
*रावण जैसे योद्धा कभी, भी *सागर मरा नहीं करते।।*✍
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✍✍ बेखौफ शायर/ गीतकार/ लेखक /चिंतक…
डॉ. नरेश कुमार “सागर”
✍✍प्रस्तुत गीत के सभी प्रमाण डॉ. नरेश सागर के नाम है
*बात यदि सही और सच्ची कही हो तो अपने सभी जानकार लोगों को यह सच्चाई फॉरवर्ड करे

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Hello! i am naresh sagar. I am an international writer.I am write my poetry in...
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