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रावण बदल के राम हो जायेंगे

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

March 14, 2017

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे।
इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !!

न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !
नंगे यंहा सब इज्जत-ऐ-हमाम हो जायेंगे !!

देकर देखो मौक़ा लिखने का तवायफ को भी !
शरीफ़ इस शहर के सारे, बदनाम हो जायेंगे।।

दबे हुए है शुष्क जख्म इन्हें दबा ही रहने दो !
लगी जो हवा, दर्द फिर सरे-आम हो जायेंगे।।

सुना है दानव भी बस गये है आकर रघुकुल में !
अब जरूर सारे रावण बदल के राम हो जायेंगे।।
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डी. के. निवातिया
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Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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