रावण बदल के राम हो जायेंगे

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे।
इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !!

न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !
नंगे यंहा सब इज्जत-ऐ-हमाम हो जायेंगे !!

देकर देखो मौक़ा लिखने का तवायफ को भी !
शरीफ़ इस शहर के सारे, बदनाम हो जायेंगे।।

दबे हुए है शुष्क जख्म इन्हें दबा ही रहने दो !
लगी जो हवा, दर्द फिर सरे-आम हो जायेंगे।।

सुना है दानव भी बस गये है आकर रघुकुल में !
अब जरूर सारे रावण बदल के राम हो जायेंगे।।
!
!
!

डी. के. निवातिया
*** *** ***

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 231

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share