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रावण की ओर से शुभ कामनाएँ दशहरे की

Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta

कविता

September 30, 2017

हँसकर रावण बोल रहा है
आज यदि होते श्री राम
कितने रावण मार गिराते ?
इतने तीर कहाँ से लाते ?
आ भी जाते
चल भी जाते
बचता कौन ?
सभी तो है अहं के मारे
सब मारे जाते
कुछ गिने चुने ही बच पाते ।

मुझे जलाने वाले लोगो
मुझ में तुम बहुत फर्क है
मैंने हरण किया सीता का
तुम तो चीर हरण करते हो
कितना बड़ा पाप करते हो
पहले अपना अहं जलाओ
फिर जलाना मुझको
अहं तुम्हारा जल जाए
तुम तदंतर
दीवाली को दीप जलाना ।

Author
Laxminarayan Gupta
मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|
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