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राम नाम

सगीता शर्मा

सगीता शर्मा

कविता

February 27, 2017

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राम नाम की जपलो माला.
काहे इंसा मोह को पाला
वांट जोहती सबरी देखी
काहे करे अधर्म अनदेखी
पार लगाये थे रधुरइया
बन जाओ तुम एसे खिवैया
राम ने रावण को यु मारा
था वो ज्ञानी फिर भी हारा.

राम नाम से पार लगाओ.
मन अज्ञान को आज मिटाओ
दुख से मनवां तू क्यू हारे.
राम नाम ने कितने तारे
भेष बदल कर की चतुराई.
जब रावण ने सिया चुराई.

पूँछत डोले वन वन डोले
न ही मोर पपीहरा बोले.
भटक गये हारे रधुराई.
खग म्रग ने फिर राह दिखाई.
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संगीता शर्मा.
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25/2/2017.
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Author
सगीता शर्मा
परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.
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