दोहे · Reading time: 2 minutes

राम नाम ही बोलिये, महावीरा

राम नाम ही बोलिये, हित सबका ही होय (- 2 बार)
राम नाम है वो सुधा, जिसका तोड़ न कोय……
महावीरा जिसका तोड़ न कोय……

लोग जहाँ प्रसन्न नहीं, वहाँ न जाओ आप (- 2 बार)
जिया रमाओ राम में, मिटें सभी सन्ताप……
महावीरा मिटें सभी सन्ताप……

देह जाय तक थाम ले, राम नाम की डोर (- 2 बार)
फैले तीनों लोक तक, इस डोरी के छोर……
महावीरा इस डोरी के छोर……

तन की आभा वस्त्र है, मन की शोभा बात (- 2 बार)
उत्तम बातें कीजिये, याद रहे दिनरात……
महावीरा याद रहे दिनरात……

त्याग दिए जिसने व्यसन, वो नर बने महान (- 2 बार)
राज सुखों को त्याग कर, बढ़ी राम की शान……
महावीरा बढ़ी राम की शान…….

सुःख-दुःख में जो मित्र के, आते हर पल काम (- 2 बार)
प्रभु उनके संकट हरे, प्रसन्न उनसे राम……
महावीरा प्रसन्न उनसे राम…….

गुण-अवगुण के साथ यदि, करते सोच-विचार (- 2 बार)
अच्छे मानव आप हैं, उत्तम यह व्यवहार……
महावीरा उत्तम यह व्यवहार……

अपशब्दों से होत है, चरित्र की पहचान (- 2 बार)
गुस्से में अपशब्द का, रखिए हर पल ध्यान……
महावीरा रखिए हर पल ध्यान…….

छल है, माया रूप है, सब मिथ्या संसार (- 2 बार)
राम नाम से नेह कर, बाक़ी सब बेकार……
महावीरा बाक़ी सब बेकार…….

राम भक्ति वो फूल है, जिसका फल है ज्ञान (- 2 बार)
वर दे उनको शारदे, वो सब हैं विद्वान……
महावीरा वो सब हैं विद्वान…….

जिसने पाया राम को, उसे न जग से काम (- 2 बार)
जिसको लागी राम धुन, वो पाए सुखधाम……
महावीरा वो पाए सुखधाम…….

भक्तों में हैं कवि अमर, स्वामी तुलसीदास (- 2 बार)
‘रामचरित मानस’ रचा, राम भक्त ने ख़ास……
महावीरा राम भक्त ने ख़ास…….

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